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टेक्नालजी न्यूज़

टेक्नालजी न्यूज़ (84)

नई दिल्ली। लगातार हो रहे रेल हादसों को रोकने के लिए रेल मंत्रालय ने एक नया प्लान बनाया है। रेल मंत्रालय ने पटरियों की जांच के लिए इस्तेमाल की जा रही सभी ट्रालियों में जीपीएस ट्रैकर लगाने का फैसला किया है। इन ट्रालियों को पटरी पर हाथ से धकेल कर चलाया जाता है और रेल के आने से पहले ये सुनिश्चित किया जाता है कि ट्रैक ठीक है या नहीं।

6 सितंबर को रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को एक पत्र भेज कर एक महीने के अंदर इसके लिए तैयारी शुरु करने को कहा है। पत्र में ये निर्देश दिया गया है कि सभी ट्रालियों के लिए अलग-अलग नंबर निर्धारित की जाए, जिससे पटरियों की सुरक्षा जांच प्रभावी तरीके से हो सके। साथ ही एक महीने के अंदर ट्रालियों पर जीपीएस ट्रैकर लगाने का काम पूरा कर लिया जाए। जानकारों का मानना है कि ऐसी प्रणाली विकसित करने से यह सुनिश्चित हो पाएगा कि सेक्शन इंजीनियर नियमित रूप से निगरानी कर रहे हैं या नहीं। साथ ही मरम्मत कार्यों का भी समूचित रूप से जायजा लिया जा सकेगा।

चर्चित WannaCry रैन्समवेयर का नाम तो आपने सुना ही होगा. हाल ही में इस रैंसमवेयर की चपेट में सैकड़ों देशों के लाखों कंप्यूटर्स आए. इनमें सबसे ज्यादा विंडोज कंप्यूटर्स थे. यह कथित तौर पर एनएसए द्वारा डेवेलप किया गया टूल था जिसे हैकर्स चुरा कर इसे पैसे कमाने के लिए यूज कर रहे हैं.

WannaCry रैन्समवेयर का खतरा अभी तक टला नहीं है कि अब एक ऐसा ही नया मैलवेयर आ चुका है. इसका नाम EternalRocks बताया जा रहा है. खास बात यह है कि यह रैन्समवेयर भी कथित तौर पर अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी द्वारा ही डेवलप किया गया है.

EternalRocks इसलिए भी खतरनाक है, क्योंकि रिसरचर्स का मानना है कि यह एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में फैलने के लिए एनएसए के सात हैकिंग टूल को यूज करता है. इनमें EternalBlue, EternalChampion, Eternalsynergy, Doublepulsar, Architouch और SMBTouch शामिल हैं.

गौरतलब है कि अप्रैल में एनएसए के हैकिंग टूल को कथित तौर पर शैडो ब्रेकर नाम के हैकर ग्रुप ने लीक कर दिया था. इसके बाद ग्रुप ने यह धमकी भी दी कि अगले कुछ महीने में डेटा डंप कर दिया जाएगा.

कैसे काम करता है यह मैलवेयर
इस रैन्समवेयर के काम करने का तरीका थोड़ा अलग है. क्योंकि यह पहले स्टेज में यह सिस्टम को इन्फेक्ट करता है और टोर नेटवर्क डाउनलोड करता है. अटैक का दूसरा स्टेज 24 घंटे के बाद शुरू होता है जब कमांड और कंट्रोल सर्वर रिस्पॉन्ड करता है. देर से अटैक करना एक ट्रिक है, ताकि सिस्टम के लिए इसे डिटेक्ट कर पाना मुश्किल हो.

कुछ साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इटरनल रॉक्स नाम का यह मैलवेयर WannaCry से भी खतरनाक है , क्योंकि इसकी कोई कमजोरी नहीं है. सबसे भयावह यह है कि इसका कोई किल स्विच नहीं होता जिसके जरिए रिसरचर्स मैलवेयर पर लगाम लगाते हैं. इसकी वजह यही है कि यह कंप्यूटर में आने के 24 घंटे बाद काम करना शुरू करता है ताकि इसे रोका न जा सके.

नई दिल्ली: रिलायंस रिटेल ने अपने ग्राहकों के लिए जियो फाई (पोर्टेबल 4जी वॉयस एंड डाटा हॉटस्पॅाट) डिवाइस पर दो आकर्षक कैशबैक ऑफर पेश किए हैं.

मीडिया सूत्रों के मुताबिक कंपनी जियोफाई डिवाइसेज पर '100 प्रतिशत कैशबैक ऑफर अंडर एक्सचेंज' और '50 प्रतिशत कैशबैक ऑफर विदाउट एक्सचेंज', ऑफर पेश किये गए हैं.

कंपनी जियोफाई 4जी राउटर खरीदने वाले कस्टमर्स को 100% कैशबैक ऑफर दे रही है. इसके लिए कस्टमर को पुराना डाटा कार्ड, डोंगल या वाई-फाई हॉटस्पॉट राउटर्स एक्सचेंज करना होगा.

कंपनी दो तरह के ऑफर दे रही है

रिलायंस जियो डिजिटल स्टोर और जियो केयर सेंटर पर यह ऑफर उपलब्ध हैं. कंपनी दो तरह के ऑफर दे रही है.पहले प्लान के मुताबिक, कस्टमर को पुराना डोंगल और 1,999 रुपए देने होंगे. बदले में कंपनी जियो-फाई डिवाइस और 2010 रु. वैल्यू का फ्री 4जी डाटा देगी.

अगर कस्टमर बिना एक्सचेंज के जियो-फाई डिवाइस खरीदना चाहते हैं तो भी उन्हें 1,999 रु. देने होंगे. हालांकि, इस प्लान में कस्टमर को 1005 रु. वैल्यू का फ्री 4जी डाटा ही दिया जाएगा.

WhatsApp ने पिछले साल नवंबर में वीडियो कॉलिंग फीचर को दुनियाभर के यूजर्स के लिए लॉन्च किया था. इसके 6 महीने बाद व्हाट्सऐप ने जानकारी दी है कि भारत वीडियो कॉलिंग फीचर को उपयोग करने के मामले में विश्व में सबसे आगे है.

कंपनी ने जानकारी दी है कि भारत में वीडियो कॉलिंग के हर दिन करीब 50 करोड़ मिनट रिकॉर्ड किए गए हैं. जो दुनियाभर में व्हाट्सऐप उपयोग किए जाने वाले किसी भी देश की तुलना में सबसे ज्यादा है. इन आंकड़ों से पता चलता है कि व्हाट्सऐप के लिए भारत इतना अहम क्यों है और क्यों कंपनी अपने भविष्य के बिजनेस प्लान्स के लिए भारत को इतना तवज्जो देती है.

व्हाट्सऐप के दुनियाभर में कुल 1.2 बिलियन एक्टिव यूजर्स हैं, जिसमें से हर महीने 200 मिलियन एक्टिव यूजर्स अकेले भारत से ही है. कंपनी के वीडियो कॉलिंग फीचर को दुनियाभर में बहुत तेजी से अपनाया गया है. इसमें दुनियाभर में हर रोज 340 मिलियन मिनट वीडियो कॉलिंग का आंकड़ा कंपनी ने दर्ज किया है. WhatsApp के दावे के मुताबिक इस ऐप के यूजर्स 55 मिलियन वीडियो कॉल हर रोज करते हैं.

340 मिलियन मिनट वीडियो कॉलिंग में से 50 मिलियन मिनट वीडियो कॉलिंग केवल भारत से ही किया गया है. आपको बता दें कि व्हाट्सऐप ने अपने प्रतिद्वंदियों के मुकाबले इस फीचर को काफी देरी से पेश किया था. इसके बावजूद इतने कम समय में इतने यूजर्स को अपनी ओर आकर्षित करना वाकई कमाल की बात है.

Whatsapp ने अपने वीडियो कॉलिंग फीचर को लॉन्च करते भी कहा था कि इस नए वीडियो कॉलिंग फीचर को भारत को ध्यान में रखकर बनाया गया है. जहां यूजर्स अक्सर स्लो इंटरनेट कनेक्शन की वजह से परेशान रहते हैं.

एलफाबेट इंक (Alphabet Inc) ने यूजर्स से कहा है कि वे ईमेल में आए किसी भी गूगल डॉक्यूमेंट लिंक को न खोलें. हजारों यूजर्स के अकाउंट हैक होने के बाद गूगल ने यह एडवाइजरी जारी की है.

कैसे करता है ये काम?

यूजर्स को उनके कॉन्टेक्ट में मौजूद लोगों के नाम से गूगल डॉक्यूमेंट लिंक का ई-मेल आता है , जिसको ओपन करते ही एक गूगल का होस्टेड पेज खुल गया, जिस पर यूजर के गूगल अकाउंट की लिस्ट सामने आती है.

और जैसे ही यूजर इस अकाउंट पर क्लिक करते हैं, ये आपसे ‘गूगल डॉक्स’(Google Docs) ऐप को एक्सेस करने की परमीशन मांगता है. इसके बाद ‘अलॉउ (Allow)’ का पॉप अप सामने आता है जिस पर क्लिक करते ही ये आपके सारे इमेल को एक्सेस करके उन्हें पढ़ सकता है.


इतना ही नहीं ये आपके इमेल को पूरी तरह एक्सेस करने के बाद, फ्रॉड डॉक(Doc) लिंक आपके सारे कॉन्टेक्ट को भी भेजा जा सकता है.

कैसे पता करें की कहीं आपके साथ भी तो नहीं हुआ फ्रॉड?

ये पता करने के लिए आप गूगल अकाउंट में ‘ऐप परमीशंस(App Permissions)’ में जाएं. और फिर ‘गूगल डॉक(Google Doc)’ ऐप को ढूंढे और अगर आपको ये नहीं दिखाई देता है तो समझ लें कि आप सुरक्षित हैं.

कैसे बचें?

अगर आपको ऐप परमीशंस में ‘गूगल ऐप’ लिस्टेड नज़र आता है तो आप इस पर टैप करके रिमूव(Remove) आइकन पर क्लिक करके इससे बच सकते हैं.

गूगल डॉक(Google Doc) के ट्वीटर अकाउंट ने इस फ्रॉड को कंर्फम किया है और साथ ही यूजर्स को ऐसे लिंक्स को खोलने के लिए वॉर्न किया है. कंपनी यूजर्स को ऐसे फिशिंग(इमेल के जरिए किया गया फ्रॉड) से प्रोटेक्ट करने के प्रोसेस पर काम कर रही है.


सर्च इंजन गूगल ने एक नया फीचर पेश किया है जिसे 'कॉपीलेस पेस्ट' नाम दिया गया है। ऐंड्रॉयड यूजर्स के लिए पेश किए गए इस फीचर के तहत क्रोम पर आप जो भी सर्च करेंगे, बाद में इस्तेमाल होने वाले संबंधित ऐप्स में उसे पेस्ट करने का ऑप्शन अपने आप आ जाएगा।

'Copyless Paste' फीचर को यूज करने के लिए क्रोम का एक्सपेरिमेंटल वर्जन Chrome Canary इंस्टॉल करना होगा। इसमें क्रोम के अंदर Flags में जाने पर यह फीचर दिखेगा। क्रोम फ्लैग्स दअसल क्रोम में के एक्सपेरिमेंटल वर्जन में उन फीचर्स को ऑन और ऑफ करने का तरीका है, जिनकी टेस्टिंग की जा रही होती है। इसलिए इस फीचर में अभी आपको कुछ कमियां मिल सकती हैं।

इस नए फ्लैग की डिस्क्रिप्शन में लिखा गया है, 'अगर आप ब्राउजर पर किसी रेस्तरां की वेबसाइट देखने के बाद मैप्स ऐप पर जाते हैं तो कीबोर्ड खुद ही आपको उस रेस्तरां का नाम सर्च बार में एंटर करने के लिए सजेस्ट करेगा।' इस डेटा को फोन पर ही स्टोर किया जाता है और गूगल को नहीं भेजा जाता।

Facebook अपने एेप को बढ़िया बनाने के लिए हमेशा उसमें नए-नए फीचर्स शामिल करता रहता हैं. Facebook पिछले दो सालों से Building 8 नाम के एक सीक्रेट प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. दरअसल, यह प्रोजेक्ट माइंड रीडिंग तकनीक यानी दिमाग पढ़ने वाली टेक्नॉलॉजी पर है. इसके अलावा इवेंट के दौरान इस प्रोजेक्ट के बारे में ऐसी कई चीजे बताई गई हैं जिसे जानकर लोगों को काफी हैरानी हुई है.

रिर्पोट के मुताबिक, फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्क ने कहा कि सोशल नेटवर्क फेसबुक ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस टेक्नॉलॉजी पर काम कर रही है जो एक दिन सिर्फ दिमाग के जरिए बातचीत करना काफी आसान बना देगा. जरा सोचिए, आप जो भी सोच रहे हैं वो बिना हाथों से टाइप किए स्क्रिन पर टाइप हो रहा है.

ऐसा ही कुछ एक इंवेट के दौरान हुआ है. एक ऐसी महिला जो बोल या सुन नहीं सकती है. वो ना अपना हाथ हिला सकती है और नही टाइप कर सकती है लेकिन इस वीडियो में दिखाया गया है कि वो सिर्फ सोच रही हैं और स्क्रीन पर वर्ड्स खुद ब खुद टाइप हो रहे हैं. हालांकि यह हमारे स्मार्टफोन और कंप्यूटर में टाइप किए गए वर्ड्स से काफी स्लो है, लेकिन कंपनी के मुताबिक जब यह टेक्नॉलॉजी हकीकत बनेगी तो इसकी स्पीड भी बढ़ जाएगी.

इस प्रोजेक्ट की हेड रेगीना ने यह भी खुलासा किया है कि उनकी टीम सिर्फ ब्रेन वेभ के जरिए एक मिनट में 100 वर्ड्स टाइप करने पर काम कर रही है. इसके अलावा फेसबुक और भी कई ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है जिसमें इंसानों की स्किन के जरिए स्पोकेन लैंग्वेज डिलिवर करना भी शामिल है जो काफी हैरान करने वाला है. यानी स्किन के जरिए भी इंसान सुन सकता है.

स्मार्टफ़ोन मेकर कंपनी इंटेक्स ने इंटेक्स एक्वा 4 जी मिनी के बाद से कंपनी ने अपनी नई सीरीज़ ELYT को लॉन्च कर दिया है. इस सीरीज का पहला स्मार्टफ़ोन इंटिंक्स ELYT-E1 है. इस स्मार्टफोन की कीमत 6,999 रुपए है.
स्पेसिफिकेशन
- स्मार्टफोन में 5.0 इंच (720x1280 पिक्सेल) डिस्प्ले में मौजूद है.
- 1.2 गीगाहर्ट्ज़ सँप्रेरग्न 410 क्वॉड कोर प्रोसेसर मौजूद है.
- इस डिवाइस में बहु टास्किंग के लिए रैम 2GB मौजूद है.16
- जीबी इंटरनल स्टोरेज दी गई है जिसे 128GB तक बढ़ाया जा सकता है.
- स्मार्टफोन में रियर और 8 मेगापिक्सेल का फ्रंट कैमरा दिया गया है.इसमें मेटल बाडी के साथ फिंगरप्रिंट सेंसर मौजूद है .
- राइट ऐज़ पर वॉल्यूम और पावर बटन मौजूद हैं .
- यह स्मार्टफोन एंड्रॉइड 6.0 मारशैलो आपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है.
- पावर बैकअप के लिए इस डिवाइस में 2200mAhकी बैटरी है.
- कनेक्टिविटी के लिए इस फोन में 3.5 मिमी जैक, ब्लूटूथ, वाई फाई, जीपीएस, एफएफ एमडी रेडियो और यूएसबी 2.0 मौजूद है.

 


नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद से ही भारत को डिजिटल बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो भारत में डिजिटल वॉलेट के बढ़ते चलन को देखकर WhatsApp डिजिटल पेमेंट सेक्टर में आने के बारे में सोच रहा है। इन दिनों WhatsApp में आने वाले नए फीचर को लेकर चर्चाएं काफी जोर-शोर से हो रही हैं। खबरों कि मानें तो WhatsApp UPI बेस्ड डिजिटल पेमेंट सिस्टम लाने की तैयारी कर रहा है, जो डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए बनाया जा रहा है। सुनने में आ रहा है कि ये फीचर इस साल के आखिरी तक लॉन्च हो सकता है।
'दे केन' वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल ट्रांजेक्शन बिजनेस के लिए वॉट्सएप और एनपीसीआई (नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) में बातचीत चल रही है. कंपनी इसके लिए ऐसे शख्स को तलाश रही है, जो आधार, यूपीआई और भीम एप में एक्सपर्ट नॉलेज रखता हो. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ये सर्विस यूजर टू यूजर बेस्ड होगी और अगले 6 महीने में लॉन्च हो सकती है.


क्या है UPI बेस्ड डिजिटल पेमेंट सिस्टम?

ध्यान दें कि भारत में पिछले साल काले धन की समस्या से निपटने के लिए और अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार द्वारा नोटबंदी का फैसला लिया गया था। इसके बाद देश में digitalization को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। नोटबंदी के बाद कैशलैस सुविधा के लिए सरकार ने भीम एप जैसी सर्विस भी पेश की। इसके अलावा कैशलैस सर्विस और digitalization को बढ़ावा देने के लिए कई मोबाइल वॉलेट एप और डिजिटल पेमेंट एप शुरु किए गए। हाल ही में ट्रूकॉलर 8 को एंड्रायड के लिए लॉन्च किया गया। इसमें कई नए फीचर्स दिए गए, जिसमें यूजर्स यूपीआई प्लेटफॉर्म की मदद से ट्रांजेक्शन कर सकते हैं।
व्हाट्सएप की यह नई सर्विस देश में पहले से उपलब्ध पेमेंट सर्विस जैसे कि एंड्रायड पे और एप्पल पे के लिए कड़ी टक्कर साबित हो सकती है। गौरतलब है कि इसी साल व्हाट्सएप के सह-संस्थापक ब्रायन एक्टन ने संकेत दिया था और कहा था कि, "हम भारत में अधिक से अधिक लोगों को निवेश करने में सहायता करना चाहते हैं"।
और कौन-कौन से है पेमेंट वॉलेट?
आपको बता दें कि सैमसंग ने भी हाल ही में भारत में अपनी लोकप्रिय डिजिटल सर्विस सैमसंग पे को लॉन्च किया था। इसमें उपभोक्ताओं को स्मार्टफोन के साथ-साथ फीचर फोन में भी कॉन्टैक्टलैस पेमेंट की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा भीम एप के द्वारा भी आप डिजिटल पेमेंट कर सकते है और माना जा रहा है कि एप्पल के फोन में भी पेमेंट सर्विस जैसे फीचर्स आने वाले है।

इन्टरनेट स्पीड को लेकर चल रही खींचतान के बीच दूरसंचार नियामक ट्राई के डेटा के अनुसार स्पीड के मामले में रिलायंस जियो सबसे टॉप पर है और उसने बाकी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है.

भ्रामक है Airtel का 'सबसे तेज मोबाइल नेटवर्क' वाला विज्ञापन: ASCI

ट्राई का कहना है कि रिलायंस जियो की डेटा डाउनलोड स्पीड आइडिया सेल्यूलर और एयरटेल की तुलना में लगभग दोगुनी है. ट्राई ने फरवरी महीने के लिए अपने मासिक औसत मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड डेटा में कहा है कि जियो नेटवर्क की डाउनलोड स्पीड फरवरी महीने में घटकर 16.48 mbps रही जो कि जनवरी में 17.42 mbps थी.

फिर भी इस महीने में जियो सबसे तेज नेटवर्क बना रहा. अगर इस स्पीड से डाउनलोड की बात की जाए तो एक मूवी पांच मिनट से भी कम समय में डाउनलोड की जा सकती है. डाउनलोड स्पीड के लिहाज से प्रतिस्पर्धी आइडिया सेल्यूलर 8.33 mbps के साथ दूसरे व एयरटेल 7.66 mbps के साथ तीसरे स्थान पर है.

वहीं वोडाफोन के लिए यह स्पीड 5.66 mbps और BSNL के लिए 2.89 mbps आंकी गई है. जारी डेटा के अनुसार फरवरी के आखिर में एवरेज डाउनलोड स्पीड रिलायंस कम्युनिकेशंस के लिए 2.67 mbps, टाटा डोकोमो के लिए 2.67mbps और एयरसेल में 2.01 mbps आंकी गई.

अन्य नेटवर्क के लिए औसत डाउनलोड स्पीड उपलब्ध नहीं है. उल्लेखनीय है कि देश में सबसे तेज नेटवर्क के दावे को लेकर जियो व एयरटेल के बीच खासा विवाद रहा है.

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