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देश-विदेश

देश-विदेश (114)

एक RTI के जवाब में केंद्र सरकार ने यह जवाब दिया है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत विमान हादसे से हुई है। हालांकि, सरकार के इस जवाब से नेताजी के परिवार वाले खुश नहीं है। नेता जी के पोते चंद्रकुमार बोस ने कहा है कि सरकार का यह व्यवहार काफी गैर जिम्मेदाराना है, केंद्र सरकार इस तरह का जवाब कैसे दे सकती है, जबकि मामला अभी तक सुलझा नहीं है।
दरअसल, सूचना के अधिकार(RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में गृह मंत्रालय ने जवाब दिया है कि, “नेता जी की मौत से जुड़ी 37 फाइलें जारी की थी, सहनवाज कमेटी, जस्टिस जीडी खोसला कमीशन और जस्टिस मुखर्जी कमीशन की रिपोर्ट देखने के बाद सरकार इस नतीजे पर पहुंची है कि नेताजी 1945 में विमान दुर्घटना में मारे गए थे।”


सायक सेन नाम के एक शख्स ने RTI दायर कर यह सवाल किया था, जिसके जवाब में गृह मंत्रालय ने यह जानकारी दी।
चंद्र कुमार बोस का कहना है कि गृह मंत्रालय को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए और इस मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया जाना चाहिए। सभी फाइलों की जांच व अध्ययन हो।
गौरतलब है कि भारत की स्वतंत्रता के लिए आजाद हिंद फौज का नेतृत्व करने वाले सुभाष चंद्र बोस की मौत एक रहस्य बनी हुई है। पिछले कुछ समय पहले से बोस के परिवारवालों की तरफ से इस मुद्दे को उठाया गया है। उनके परिजनों ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

राजस्थान हाई कोर्ट ने गायों की सुरक्षा के लिए ज्यादा सख्त प्रावधान लाने का समर्थन किया है. जयपुर की हिंगोनिया गोशाला से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए बुधवार को अदालत ने केंद्र सरकार को गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव दिया. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक जस्टिस महेश चंद्र शर्मा ने यह भी कहा कि गोहत्या पर सजा को बढ़ाकर उम्र कैद कर देना चाहिए. फिलहाल राज्य में गोहत्या पर तीन साल की सजा का प्रावधान है.

रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान हाई कोर्ट ने एंटीकरप्शन ब्यूरो के अतिरिक्त महानिदेशक को प्रत्येक तीन महीने में गौशालाओं पर रिपोर्ट तैयार करने और शहरी विकास सचिव और नगरपालिका आयुक्त को हर महीने गौशालाओं का निरीक्षण करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा अदालत ने वन विभाग से हर साल गौशालाओं में 5,000 पेड़ लगाने को भी कहा है. हिंगोनिया गौशाला पिछले साल सैकड़ों गायों के मरने की खबर के साथ चर्चा में आई थी. शुरुआत में प्रशासन ने गायों की मौत के लिए उनका बूढ़ा और बीमार होना वजह बताया था. लेकिन, बाद में आई जांच रिपोर्ट में उनकी मौत की वजह देखभाल की कमी को पाया गया था.

राजस्थान हाई कोर्ट का यह सुझाव ऐसे समय में आया है, जब केंद्र सरकार द्वारा पशु बाजारों में मांस के लिए मवेशियों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने का केंद्र का फैसला विवादों में है. केरल, कर्नाटक, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसी कई राज्य सरकारें इसका विरोध कर रही हैं. इस बीच, मंगलवार को मद्रास हाई कोर्ट की मदुरई बेंच ने इस फैसले से संबंधित प्रावधानों पर चार हफ्ते के लिए रोक लगा दी है.

नई दिल्ली. बाबा रामदेव की अगुवाई वाली पतंजलि आयुर्वेद जीएसटी की उंची दर से नाखुश है. उन्होंने सरकार से पूछा है कि बेहतर स्वास्थ्य के अधिकार के बिना लोग अच्छे दिन को कैसे महसूस और जी सकते हैं. कंपनी का कहना है कि आयुर्वेद उत्पाद के जरिये आम लोगों को सस्ती दर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा सकती हैं. उद्योग संगठन एसोसिएशन आफ मैनुफैक्चरर्स आफ आयुर्वेदिक मेडिसिन्स (एएमएएम) ने भी कहा कि एक तरफ जहां सरकार आक्रमक तरीके से वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद को बढ़ावा दे रही है वहीं जीएसटी के तहत अधिक कर से कुदरती दवाएं महंगी होंगी तथा आम लोगों की पहुंच से बाहर हो जाएंगी.

संगठन ने कहा कि प्रस्तावित 12 प्रतिशत के बजाए परंपरागत आयुर्वेदिक या जेनेरिक दवाएं शून्य और पेटेंटशुदा उत्पादों के लिये 5 प्रतिशत होना चाहिए. फिलहाल आयुर्वेदिक दवाएं और उत्पादों वैट समेत कुल कर प्रभाव 7 प्रतिशत है जो औषधि पर निर्भर है. जीएसटी व्यवस्था के तहत इन औषधियों पर 12 प्रतिशत कर रखा गया है. पतंजलि आयुर्वेद लि. तथा पतंजलि योगपीठ के प्रवक्ता एस के तिजारावाला ने कहा, आयुर्वेदिक श्रेणी पर उच्च जीएसटी दर से हमें अचंभा हुआ और यह हमारे लिये निराशाजनक तथा दु:खद है. उन्होंने आगे कहा कि आयुर्वेद आम लोगों को सस्ती दर पर इलाज सुविधा उपलब्ध कराता है. यह सदियों से इलाज का परखा का हुआ जरिया है.

पतंजलि आयुर्वेद के तिजारावाला ने कहा, की अच्छा स्वास्थ्य और स्वस्थ्य जीवन आम लोगों का मूल अधिकार है. इसके बिना कोई कैसे अच्छे दिन को महसूस कर सकता है.एएमएएम के महासचिव प्रदीप मुलतानी ने इसी प्रकार की राय जाहिर करते हुए कहा, भारत सरकार आक्रमक तरीके से आयुर्वेदिक उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दे रही है लेकिन उंची कर लगाने के बाद इसका क्या मतलब है और देश में लोग इसका वहन नहीं कर सकते.

पंजाब के पठानकोट के मामून मिलिट्री स्टेशन के पास से एक संदिग्ध बैग मिलने के बाद से सुरक्षा एजेंसियों हाई अर्लट पर है। बैग मिलने के तुरंत बाद से स्वाट कमांडोज और सेना के जवान तलाशी अभियान में जुट गए है।
आपको बता दें, कि पठानकोट में इंडियन एयरफोर्स का बेस स्टेशन भी है। जहां पर पिछले साल आतंकियों ने हमला भी किया था।
यह संदिग्ध बैग ममून आर्मी कैंटोमेट इलाके में बीती एक स्थानीय नागरिक को मिला। जिसके बाद पुलिस को इस बैग के बारे में जानकारी दी गई। जिसके बाद से पठानकोट शहर और कैंट इलाके में तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया।

बता दें कि 2015 में भारी हथियारों से लैस सेना की वेशभूषा में तीन आतंकियों ने एक कार हाइजैक करके गुरदासपुर जिले के दीनानगर थाने पर हमला बोल दिया था। उनके हमले में एक एसपी समेत सात लोग मारे गए थे। वहीं, सीमा पर से आए चार आतंकियों ने पठानकोट एयरबेस को पिछले साल 1 और 2 जनवरी की दरमियानी रात निशाना बनाया था। इस हमले में 7 सुरक्षाकर्मियों को अपनी शहादत देनी पड़ी थी।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 मई को असम के अरुणाचल प्रदेश में एक पुल का उद्घाटन करेंगे। बता दें कि यह देश का सबसे लंबा पुल है जो कि असम के पूर्वी हिस्से में अरूणाचल प्रदेश की सीमा से सटे क्षेत्र में बना है।

इस पुल का निर्माण ब्रह्मपुत्र नदी पर हुआ है और यह एशिया द्वीप का दूसरा सबसे लंबा पुल है, जिसकी लम्बाई 9.15 किलो मीटर है। इस पुल के निर्माण और उद्द्घाटन को बीजेपी और राजग के तीन साल के सफल शासन पूरे होने के अवसर से भी जोड़ा जा रहा है।

ये पुल असम के तिनसुकिया जिले के ढोला तथा सदिया को जोड़ेगा। इससे पहले मुंबई के बांद्रा वर्ली समुद्र का पुल ङ्क्षलक सबसे लंबा माना जाता था लेकिन ङ्क्षलक की अपेक्षा यह पुल 3.55 किलो मीटर लंबा है।

इस पुल की खासियत यह है कि देश की सुरक्षा और राजनैतिक द्रष्टि से यह काफी अहम है। इस पुल पर असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा, 'हम खुश हैं कि प्रधानमंत्री पुयह पुल देश की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए रणनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है।'

उन्होंने कहा, 'हम खुश हैं कि प्रधानमंत्री पुल का उद्घाटन करेंगे। इसके निर्माण में देरी हो रही थी, लेकिन जब प्रधानमंत्री ने रूचि दिखाई तथा मैंने जा कर देरी के कारणों का पता किया तो पाया कि इसके कार्य में विस्तार हुआ था।'

भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई-30 के चीन सीमा के पास से लापता होने के मालमे में अनभिज्ञता जताते हुए भारत पर ही तनाव बनाने का आरोप लगाया है. चीन का कहना है कि उसे लापता भारतीय विमान की कोई खबर नहीं. इसके साथ ही उनसे सीमा विवाद की ओर इशारा करते हुए नसीहत भरे लहजे में कहा कि भारत को शांति भंग करने से बचना चाहिए.

चीनी विदेश मंत्रालय ने चेताया
भारत-चीन सीमा के पास से लापता हुए सुखोई विमान के बारे में जब पूछा गया तो चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ल्यू कांग ने कहा, 'सबसे पहली बात, चीन-भारत सीमा के पूर्वी हिस्से को लेकर हमारी स्थिति लगातार ही स्पष्ट रही है. वहीं दक्षिण तिब्बत के हालात पर हम करीबी नजर बनाए हुए हैं. हमें उम्मीद है कि भारत दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति पर टिका रहेगा और सीमाई इलाकों में शांति और स्थिरता को भंग करने वाली किसी भी गतिविधि से बचना चाहेगा.' इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'जिस बारे में आप जिक्र कर रहे हैं, फिलहाल मेरे पास उसकी कोई जानकारी नहीं.'

बता दें कि भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान सुखोई-30 मंगलवार सुबह चीन सीमा के पास तेजपुर एयरबेस से उड़ान भरने के बाद लापता हो गया था. यह विमान नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था और तेजपुर से 60 किलोमीटर उत्तर में रडार से इसका संपर्क टूट गया. विमान पर दो पायलट सवार थे और उनका पता लगाने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया गया है. हालांकि अभी तक इसका कोई पता नहीं चल पाया है.

7 साल में 7 हादसे
रूस से खरीदा गया सुखोई विमान वायुसेना की अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों में से हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले सात साल में 7 सुखोई विमान हादसे का शिकार हो चुके हैं. करीब 358 करोड़ रुपए की लागत वाला यह विमान 4.5 जेनरेशन का विमान है और इस समय दुनिया के श्रेष्ठ लड़ाकू विमानों की श्रेणी में शामिल है.

सुखोई विमान की खासियतें
दो-इंजन वाले सुखोई-30 एयरक्राफ्ट का निर्माण रूसी की कंपनी सुखोई एविएशन कॉरपोरेशन ने किया है. भारत की रक्षा जरूरतों के लिहाज से सुखोई विमान काफी अहम है. यह सभी मौसमों में उड़ान भर सकता है. हवा से हवा में, हवा से सतह पर मार करने में सक्षम है.

भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। भारतीय सेना ने नौशेरा सेक्टर में 20-21 मई को यह ऑपरेशन चलाया है। लगातार हो रही घुसपैठ के खिलाफ यह कार्रवाई की गई। जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही आतंकियों हमले को लेकर भारतीय सेना ने प्रेस कांफ्रेंस की। इस कार्रवाई का तीस सेकेंड का वीडियो भी जारी किया गया। जिसमें भारत की ओर से पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया जा रहा है।
सेना के मेजर जनरल अशोक नरूला ने कहा कि पाकिस्तान की सेना आतंकियों की मदद करती है, और सीमा पार भेजती है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सेना हमेशा शांति चाहती है। मेजर ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ही हमारे देश में आतंकियों को भेजती है, वह लगातार भारतीय गांवों और ग्रामीणों को निशाना बनाती है। जब पाकिस्तान की सेना हम पर हमला करती है, तभी हम उनके खिलाफ कार्रवाई करते हैं।
पिछले वर्ष 18 सितंबर को हुए उरी हमले के जवाब में 28-29 सितंबर को भारतीय सेना के वीर जवानों के द्वारा पाकिस्तान में घुस कर की गई सर्जिकल स्ट्राइक थी। सेना ने पाकिस्तान की धरती में घुसकर कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था। इस सर्जिकल स्ट्राइक में 19 पैरा कमांडोज का महत्वपूर्ण योगदान रहा था।

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयरचीफ मार्शल बीएस धनोआ ने अपने सभी 12,000 अधिकारियों को पत्र लिखकर उनसे बेहद शॉर्ट नोटिस पर किसी भी अभियान के लिए तैयार रहने को कहा है। खबर के मुताबिक, वायुसेना प्रमुख ने इस पत्र में वायु सेना के पास संसाधनों की कमी की तरफ भी इशारा किया है। यह भी पढ़ें- थल सेना का 30 साल का इंतजार खत्म, मिली एम-777 होवित्जर तोपें मुताबिक, धनोआ ने वायुसेना प्रमुख का पद संभालने के महज तीन महीने बाद 30 मार्च को लिखा गया यह पत्र सभी अधिकारियों को भेजा गया है। अपनी तरह की इस अभूतपूर्व चिट्ठी में धनोआ ने वायुसेना के भीतर 'पक्षपात' और 'यौन शोषण' के बढ़ते मामलों का भी ज़िक्र किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इससे पहले 1 मई, 1950 को तत्कालीन थलसेना प्रमुख केएम करिअप्पा और 1 फरवरी, 1986 को सेना प्रमुख जलसेना के। सुंदरजी ने ऐसी चिट्ठी लिखी थी। मगर वायुसेना प्रमुख द्वारा अधिकारियों को इस तरह पत्र लिखने का यह पहला मौका है। वायुसेना प्रमुख धनोआ ने अपने पत्र में अफसरों से कहा कि मौजूदा हालात में, हमेशा से जारी खतरे की आशंका बढ़ गई है इसलिए हमें मौजूदा संसाधनों के साथ ही बेहद शॉर्ट नोटिस पर बड़े अभियान के लिए तैयार रहने की ज़रूरत है।' इसके साथ ही इसमें उन्होंने लिखा है कि हमारा ट्रेनिंग प्रोग्राम इसे ही ध्यान में रखकर चलाया जाना चाहिए।'
ऐसा समझा जा रहा है कि धनुआ ने संभवत: पाकिस्तान की तरफ से जारी छद्म युद्ध की ओर इशारा किया है, जो कि जम्मू कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों और सैन्य कैंपों पर हमले की बढ़ी वारदातों में देखा जा सकता है। इसके अलावा यह भी माना रहा है कि धनोआ ने 'मौजूदा संसाधनों' का जिक्र वायुसेना में 'लड़ाकू बेड़े' की कमी की तरफ ध्यान दिलाने के लिए किया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ , वायुसेना अपने पास लड़ाकू विमानों की 42 स्क्वाड्रन रखने के लिए अधिकृत है, जबकि उसके पास अभी बस 33 स्क्वाड्रन ही हैं। वायुसेना प्रमुख धनोआ ने इसके साथ ही 'पिछले कुछ मौकों पर वायुसेना द्वारा प्रदर्शित ग़ैर-पेशेवर रुख़' की तरफ भी ध्याना दिलाया है और कहा कि ऐसे चीज़ों ने वायुसेना की छवि पर दाग लगाया है। धनोआ ने कहा कि कुछ बड़ी जिम्मेदारियों और पद्दोन्नती के लिए अधिकारियों के चयन में हमें 'पक्षपात' की कुछ शिकायतें देखने को मिली हैं। यह कुछ ऐसी चीज़ें हैं, जिसे हम सहन नहीं कर सकते।उन्होंने आगे लिखा कि वरिष्ठ अधिकारियों के निंदनीय व्यवहार, शारीरिक प्रताड़ना और यौन शोषण जैसे कृत्यों को भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। अखबार के मुताबिक, उसने वायुसेना के प्रवक्ता से जब इस पत्र के सिलसिले में प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की, तो उन्होंने इसे 'आंतरिक मामला' बताते हुए कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

 

पाकिस्‍तान में मौत की सजा पाए इंडियन नेवी के रिटायर्ड ऑफिसर कुलभूषण जाधव पर इंटरेनशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) ने फैसला सुनाना शुरू किया।
क्‍या कहा है कोर्ट ने
जज रॉनी अब्राहम ने कहा है कि जिन हालातों में गिरफ्तारी हुई है वे काफी विवादित हैं। भारत की ओर से बार-बार काउंसलर की मांग दोहराई गई थी। जज अब्राहम का कहना है कि भारत और पाकिस्‍तान दोनों ही विएना संधि को मानते हैं और भारत की काउंसलर मुहैया कराने की मांग को मान लेना चाहिए था। जज अब्राहम ने पाकिस्‍तान के विरोध को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। जज अब्राहम ने पाकिस्‍तान को साफ-साफ कह दिया है कि अंतिम फैसले से पहले जाधव को फांसी की सजा नहीं होनी चाहिए। पाकिस्‍तान को आईसीजे के न्‍यायिक क्षेत्र के बारे कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
किसी भी सूरत में न हो फांसी
जज रॉनी अब्राहम ने कहा कि अभी इस बात के सुबूत नहीं हैं कि जाधव वाकई जासूस है। साथ ही जज ने पाकिस्‍तान को आदेश दिया है कि जाधव को फांसी नहीं होनी चाहिए। कोर्ट को इस बात की जांच करनी होगी कि क्‍या वाकई जाधव पर खतरा है। जाधव का सजा पर रोक लगाते हुए जज अब्राहम ने कहा कि भारत के पास काउंसलर की मांग का पूरा अधिकार है।

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