SJ Financial II - шаблон joomla Форекс

wrapper

Breaking News

नीट को सुप्रीम कोर्ट से मिली हरी झंडी, 10 दिन के अंदर आ सकता है रिजल्‍ट

नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) पर स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए नीट 2017 के नतीजे घोषित करने को लेकर लगी रोक हटा दी।बोर्ड को नतीजों की घोषणा करने और काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति देते हुए न्यायाधीश प्रफुल्ल सी. पंत और न्यायाधीश दीपक गुप्ता की अवकाशकालीन पीठ ने देशभर के सभी उच्च न्यायालयों को नीट 2017 से संबंधित किसी भी याचिका पर सुनवाई नहीं करने को कहा।मद्रास उच्च न्यायालय के 24 मई के आदेश पर रोक लगाते हुए न्यायाधीश पंत ने कहा कि उच्च न्यायालय को इसकी प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था।

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की याचिका पर सभी संबंधित पक्षों पर नोटिस जारी किया है साथ ही कहा है कि कोई भी हाईकोर्ट इस मसले पर याचिका की सुनवाई न करे। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई से कहा कि वह रिजल्‍ट जारी करे और काउंसलिंग शुरू करे। इसके बाद बताया जा रहा है कि बोर्ड 10 दिन के अंदर रिजल्‍ट जारी कर सकता है।

नीट का आयोजन मेडिकल और डेंटल कॉलेज में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्सेस में प्रवेश के लिए किया जाता है। इस परीक्षा के द्वारा उन कॉलेजों में प्रवेश मिलता है, जो मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया और डेटल कांउसिल ऑफ इंडिया के द्वारा संचालित किया जाता है।

नीट रिजल्‍ट पर रोक का मामला करीब 12 लाख अभ्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा है। करीब साढे दस लाख छात्रों ने हिन्दी या अंग्रेजी भाषा में परीक्षा दी थी, जबकि करीब सवा से डेढ लाख छात्रों आठ क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा में बैठे थे।

Read more

SC ने जस्टिस कर्नन को जेल भेजने का दिया आदेश, बगावत पड़ी महंगी

नई दिल्ली । चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जेएस खेहर और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ बगावती तेवर अपनाने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस कर्णन पर बड़ी कार्रवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने कर्णन को अदालत, न्यायिक प्रक्रिया और पूरी न्याय व्यवस्था की अवमानना का दोषी मानते हुए छह महीने की सजा सुनाई है। जस्टिस कर्णन भारतीय जुडिशल सिस्टम के इतिहास में पहले ऐसे जज होंगे, जिन्हें पद पर रहने के दौरान जेल भेजे जाने का आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि आदेश का तुरंत पालन हो। सुप्रीम कोर्ट ने भविष्य में जस्टिस कर्णन के बयानों को मीडिया में प्रकाशित किए जाने पर भी रोक लगा दी है। खेहर की अगुआई वाली बेंच ने वेस्ट बंगाल के डीजीपी को निर्देश दिया है कि वह कर्णन को कस्टडी में लेने के लिए कमिटी गठित करें।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
अडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह, सीनियर एडवोकेट केके वेणुगोपाल और रूपिंदर सिंह सूरी ने कहा कि जस्टिस कर्णन को सजा मिलनी ही चाहिए। हालांकि, वेणुगोपाल ने कहा, ‘अगर जस्टिस कर्णन को जेल भेजा जाता है कि इससे जुडिशरी पर एक पदासीन जज को जेल भेजने का कलंक लगेगा।’ वेणुगोपाल के मुताबिक, सोचना यह है कि क्या सीटिंग जज को सजा दी जाए या फिर उनके रिटायरमेंट के बाद सजा दी जाए क्योंकि वह जून में रिटायर हो रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवमानना के मामले में यह नहीं देखा जा सकता है कि ऐसा एक जज ने किया है या आम शख्स ने। चीफ जस्टिस की अगुआई वाली बेंच ने कहा, ‘अगर जस्टिस कर्णन जेल नहीं भेजे जाएंगे तो यह कलंक आरोप लगेगा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक जज की अवमानना को माफ कर दिया।’ कोर्ट ने कहा कि कर्णन को सजा इसलिए दी जा रही है क्योंकि उन्होंने खुद यह ऐलान किया था कि उनकी दिमागी हालत ठीक है।

Read more

लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट का झटका, जानें क्या है 950 करोड़ का चारा घोटाला


पटना : चारा घोटाले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस मामले में लालू यादव पर अलग -अलग धाराओं में अलग-अलग मुकदमे चलाये जाएं. कोर्ट के इस आदेश के बाद अब राजद प्रमुख को विशेष सीबीआई कोर्ट से फिर से जमानत लेनी पड़ेगी. जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने सीबीआई को इस मामले में देरी करने व सुप्रीम कोर्ट में अपील बेहद देर से पेश करने पर कड़ी फटकार लगायी. कोर्ट ने सीबीआइ निदेशक को आदेश दिया कि वह इस मामले में देरी करने वालों की जिम्मेदारी तय करें. कोर्ट ने कहा कि यह देरी असहनीय है इससे सीबीआइ के मकसद पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं. इस मामले में सीबीआई ने अपने मैनुअल के अनुसार काम नहीं किया जो निंदनीय है। कोर्ट ने झारखंड हाइकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए कहा कि सीबीआइ पांच महीने में ट्रायल को पूरा करे.


जानिए चारा घोटाला मामले में कब-क्या हुआ

जनवरी, 1996

उपायुक्त अमित खरे ने पशुपालन विभाग के दफ्तरों पर छापा मारा और ऐसे दस्तावेज जब्त किए जिनसे पता चला कि चारा आपूर्ति के नाम पर अस्तित्वहीन कंपनियों द्वारा धन की हेराफेरी की गई है, जिसके बाद चारा घोटाला सामने आया।

 

11 मार्च, 1996

पटना उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को इस घोटाले की जांच का आदेश दिया, उच्चतम न्यायालय ने इस आदेश पर मुहर लगाई।

 

27 मार्च, 1996

सीबीआई ने चाईंबासा खजाना मामले में प्राथमिकी दर्ज की।

 

23 जून, 1997

सीबीआई ने आरोप पत्र दायर किया और लालू प्रसाद यादव को आरोपी बनाया।

 

30 जुलाई, 1997

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद ने सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण किया. अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा।

 

5 अप्रैल, 2000

विशेष सीबीआई अदालत में आरोप तय किया।

 

5 अक्टूबर, 2001

उच्चतम न्यायालय ने नया राज्य झारखंड बनने के बाद यह मामला वहां स्थानांतरित कर दिया।

 

फरवरी, 2002

रांची की विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई शुरू हुई।

13 अगस्त, 2013

उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई कर रही निचली अदालत के न्यायाधीश के स्थानांतरण की लालू प्रसाद की मांग खारिज की।

 

17 सितंबर, 2013

विशेष सीबीआई अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

 

30 सितंबर, 2013

बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों- लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्र तथा 45 अन्य को सीबीआई न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह ने दोषी ठहराया।

 

3 अक्टूबर, 2013

सीबीआई अदालत ने लालू यादव को पांच साल के कारावास की सजा सुनाई, साथ ही उन पर 25 लाख रुपए का जुर्माना भी किया है। लालू यादव को रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद किया गया था।

 

Read more

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला , अप्रैल से बीएस-3 वाहनों की बिक्री पर रोक


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश के पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बुधवार को बड़ा व कड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने एक अप्रैल से देश में भारत स्टेज-3 (बीएस-3) उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दे दिया। इससे तैयार खड़े 8.24 लाख से ज्यादा वाहनों की बिक्री का संकट पैदा हो गया है। इनका अनुमानित मूल्य 20 से 30 हजार करोड़ रुपए है।

1 अप्रैल से देश में बीएस-4 वाहन ही बिक सकेंगे। कोर्ट ने ऑटो कपनियों के इस तर्क को नहीं माना कि बीएस 3 वाहनों के बड़े स्टॉक होने से उनको नुकसान होगा। कोर्ट ने कहा कि सभी कंपनियों को 1अप्रैल से नए मानक लागू होने के बारे में पहले से ही पता था।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी. लोकुर व दीपक गुप्ता की पीठ ने बीएस-4 मानकों का पालन नहीं करने वाले किसी भी तरह के वाहनों का पंजीयन नहीं करने का आदेश दिया। बीएस-4 मानक 1 अप्रैल 2017 से लागू होंगे। कोर्ट का यह फैसला उस याचिका पर आया है जिसमें 31 मार्च के बाद बीएस-3 वाहनों की बिक्री व पंजीयन पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

कोर्ट ने कहा कि कि आम लोग बीएस-3 वाहन सड़क पर चला सकते हैं। उन पर इस आदेश का कोई फर्क नहीं पड़ेगा। 2014 में ही केंद्र ने आदेश दिया थाकेंद्र सरकार ने जनवरी 2014 में आदेश दिया था कि 1 अप्रैल से सभी वाहन बीएस-4 प्रदूषण मानकों पर खरे उतरने चाहिए। लेकिन ऑटो कंपनियों को ये बात साफ नहीं थी कि 1 अप्रैल से उन्हें बीएस3 वाहनों का उत्पादन बंद करना है या बिक्री।

इस कारण हीरो मोटो कॉर्प, टाटा मोटर्स, महिंद्रा, टीवीएस मोटर, अशोक लीलैंड और होंडा मोटरसाइकल के पास इन वाहनों का बड़ा स्टॉक रह गया। मंगलवार को केंद्र सरकार ने ऑटो कंपनियों के इस तर्क का समर्थन किया था कि 1 अप्रैल 2017 की तारीख बीएस 3 वाहनों के उत्पादन बंद करने की थी न कि बेचने की। कोर्ट में कंपनियों ने कहा कि वर्ष 2005 में बीएस-2 व 2010 में बीएस-3 नियम लागू किए जाते वक्त उन्हें पुराने स्टॉक बेचने की इजाजत दी गई थी। इस बार भी दी जाए।

बजाज ने किया विरोध

वाहन निर्माता कंपनी बजाज और डेमलर क्रेस्लर ने कहा कि बीएस-3 वाहनों की बिक्री जारी रखने की मांग का यह कहकर विरोध किया कि हमने बीएस-4 गाड़ियों की तकनीक और उत्पादन पर काफी निवेश किया है। बजाज ने 15 फरवरी को एलान कर दिया था कि उसने अपने सभी वाहनों को बीएस 4 मानकों के मुताबिक बना दिया है।

टोयोटा ने बीएस3 वाहनों का उत्पादन 1 साल पहले ही बंद कर दिया था। भारत बेंज ने भी 1 अप्रैल से बीएस 3 वाहनों के प्रतिबंध का समर्थन किया है। मारुति के पास भी बीएस 3 वाहनों का स्टॉक नहीं है। पिछले हफ्ते हीरो मोटो कॉर्प ने कहा था कि उसको इस कदम से 1600 करोड़ का नुकसान होगा।

6 लाख दो पहिया का स्टॉक

- 8.24 लाख बीएस-3 वाहन बिना बिके रखे हैं।

- 96 हजार व्यावसायिक वाहन इनमें शामिल हैं।

- 6 लाख दोपहिया वाहनों का स्टॉक पड़ा है।

- 40 हजार तिपहिया वाहन भी तैयार खड़े हैं।

30 हजार करोड़ तक का झटका

ऑटो कंपनियों की संस्था सियाम के मुताबिक इससे कंपनियों को 20 से 30 हजार करोड़ का नुकसान हो सकता है। भारत में 20 हजार डीलरशीप में अधिकतर में पुरानी गाड़ियों का ही स्टॉक है।

1 अप्रैल से पहले खरीदे वाहनों का पंजीयन होगा

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल 2017 से पहले खरीदे गए वाहनों का पंजीयन हो सकेगा। हालांकि बिल आदि सबूत देने होंगे, जिनसे साबित हो कि वाहन रोक तिथि से पहले खरीदा गया है। आपको यह फायदा 1 अप्रैल के बाद कंपनियां बीएस 3 प्रदूषण मानक वाले वाहन नहीं बेच पाएंगी।

मतलब अभी इन कंपनियों के पास 31 मार्च तक का समय है। कंपनियां 2 दिन में भारी डिस्काउंट के साथ बीएस 3 मानक वाली गाड़ियां बेचेंगी। अगर आप 31 मार्च से पहले वाहन खरीद रहे हैं तो उसका पक्का बिल जरूर लें।

ये हैं बीएस मानक

वाहनों के इंजन से होने वाले वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए योरपीय देशों के यूरो मानक की तर्ज पर वर्ष 2000 से भारत में स्टेज उत्सर्जन मानक लागू किए गए। अब तक भारत स्टेज-4 तक के मानक बन चुके हैं।

सरकार ने पांचवें मानक नियमों को लागू करने की बजाए 2020 से सीधे बीएस-6 मानक लागू करने का फैसला किया है।

आगे ये संभावनाएं

- वाहन कंपनियां सुप्रीम कोर्ट में फैसले पर पुनर्विचार याचिका लगा सकती हैं।

- फैसले के कारण फंस गए वाहन उन देशों में निर्यात किए जा सकते हैं, जहां उत्सर्जन मानक शिथिल हैं।

भारत स्‍टेज 4 मानक के लाभ

वाहनों से होने वाले उत्‍सर्जन संबंधी प्रदूषण के स्‍तर को कम करने में मदद करता है। उदाहरण के लिए- दोपहिया वाहनों के लिए 2 स्‍ट्रोक इंजन को बाहर करना। इलेक्‍ट्रॉनिक कंट्रोल को शामिल करना।

इससे नागरिकों और अर्थव्‍यवस्‍था के लिए स्‍वास्‍थ्‍य लागत में कमी लाने में मदद मिली है। वायु प्रदूषण से सांस संबंधी और हृदयरोग हो सकते हैं।

भारत स्‍टेज-4 ने डीजल कारों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्‍साइड में 68 फीसदी और पेट्रोल इंजन वाली कारों से 25 फीसदी की कमी की है।

डीजल इंजन वाली कारों से हाने वाले पार्टिकुलेट मैटर उत्‍सर्जन जो कैंसर की वजह बनते हैं, में भी अभूतपूर्व 80 फीसदी की कमी होगी।

बीएस-4 तकनीक वाले इंजनों में अल्‍ट्रा लो सल्‍फर फ्यूल डाला जाता है, जिससे पीएम 10 और पीएम 2.5 उत्‍सर्जन को करीब 6 फीसदी तक कम किया जा सकता है।

Read more

Contact Us

For General Enquiry
  •  : info@a1tv.tv
  •  : 0141 - 4515121, 4515151
For Advertising
  • : advt@a1tv.tv,      a1tv.advt@gmail.com
  •  : +91- 98280-11251, 98280-10551
  •  : +91- 98280-10551