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राजनीति

राजनीति (94)

नई दिल्ली. मोदी सरकार के 3 साल पूरे होने से ठीक एक दिन पहले एक बड़ी उपलब्धि के बारे में बताया गया है. नोटबंदी से देश को काफी फायदा हुआ है. नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था को करीब 5 लाख करोड़ रुपए का फायदा हुआ है. यह रिपोर्ट एक हाई लेवल इंटरनल कमेटी की स्टडी के बेसिस पर जारी की गई है. 2016-17 में कुल 300 करोड़ की ऑनलाइन ट्रांजेक्शन किया गया था, जबकि 2017-18 में ये आकंड़ा 2500 करोड़ तक पहुंच सकता है. यानी की करीब 8 गुना की बढ़ोतरी हो सकती है. नोटबंदी के जरिए 500 और 1000 के पुराने नोटों का चलन बंद कर दिया गया था.

सरकार की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था में इस वक्त 14.2 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में हैं, जो कि सारी ट्रांजैक्शन जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हैं. इसमें यह भी अनुमान लगाया गया है कि नोटबंदी की वजह से भारत का कुल निजी आयकर राजस्व भी अगले दो वर्षों में बढ़कर दोगुना हो जाएगा और इसके कुछ लाभ अभी से दिखने भी लगे हैं.

वित्त वर्ष 2016-17 के लिए सेल्फ टैक्स असेसमेंट फॉर्म भरने वाले लोगों की संख्या में 23.8 फीसदी का उछाल देखा गया है. सरकार का मानना है कि इस 23.8 फीसदी में से कम से कम 10 फीसदी का बढ़ोतरी को नोटबंदी की वजह से ही देखने को मिली है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, नोटबंदी का एक सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि लोग डिजिटल लेनदेन की तरफ आकर्षित हुए हैं. वित्त वर्ष 2016-17 में कुल 300 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन दर्ज की गई. वहीं सरकार का अनुमान है कि वित्तवर्ष 2017-18 के शुरुआती हफ्तों का चलन आगे भी जारी रहा तो इस साल डिजिटल ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़कर 2,500 करोड़ तक जा सकती है.

पेटीएम, एसबीआई बडी और फ्रीचार्ज आदि मोबाइल वॉलेट के जरिये अभी ही रोजाना करीब 200 करोड़ रुपये का लेनदेन हो रहा है. वहीं BHIM ऐप के लॉन्च होने के पांच महीनों के अंदर करीब दो करोड़ लोगों ने इसे डाउनलोड किया है. इस अध्ययन के मुताबिक, BHIM और UPI पेमेंट गेटवे के जरिये अभी ही करीब रोजाना 140 करोड़ रुपये का लेनदेन हो रहा है. वहीं डेबिट कार्ड का भी इस्तेमाल नोटबंदी के बाद से काफी बढ़ा है. वर्ष 2015-16 में जहां डेबिट कार्ड से करीब 117 करोड़ ट्रांजैक्शन हुआ, जो कि 1.58 लाख करोड़ मूल्य का था. वहीं 2016-17 में यह बढ़कर 240 करोड़ ट्रांजैक्शन हो गया, जिसका कुल मूल्य 3.3 लाख करोड़ रुपये था.

नई दिल्ली: केंद्रीय कर्मचारियों को सरकार एक जल्द ही एक अच्छी खबर सुना सकती है। सरकारी विभाग के सचिवों की एक उच्च स्तरीय समिति आज कर्मचारियों के भत्ते को लेकर बैठक कर सकती है।
बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों के भत्ते को लेकर अशोक लवासा की अध्यक्षता में बनी समिति सातवें वेतन आयोग पर अपनी समीक्षा रिपोर्ट वित्त मंत्री अरुण जेटली को पहले ही दे चुकी है।
हालांकि सचिवों की इस बैठक की कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं दी गई है लेकिन, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यह बैठक बुधवार को हो सकती है।
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कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा के साथ गृह मंत्रालय, कार्मिक और प्रशिक्षण, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और रेलवे के अधिकारी इस बैठक में हिस्सा ले सकते हैं।
यहां पढ़िए मुख्य बातें -
1. बैठक में संशोधित भत्ते पर एरियर और बेसिक वेतन में बढ़ोत्तरी जैसे मुख्य मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
2. सातवें वेतन की सिफारिशों की समीक्षा का काम केंद्र सरकार ने वित्त सचिव असोक लवासा को दिया है।
3. अगर इस बैठक में सचिवों की समिति की सहमति बनती है तो रिपोर्ट अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय कैबिनेट को भेजी जाएगी।
4. सातवें वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों के कुल 196 भत्तों में से 52 भत्ते खत्म करने की सलाह के साथ ही 36 छोटे भत्तों को बढ़ाने की बात कही थी।
5. अगर ये सिफारिशें लागू हुईं तो इससे 50 लाख केंद्रीय कर्मियों को लाभ मिलेगा।

नई दिल्ली. कोयला घोटाले में दोषी पाए गए पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता और पूर्व डायरेक्टर केसी समारिया को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट स्थित स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दो साल की सजा सुनाई है. दोनों को कोयला घोटाले में पिछले दिनों अदालत ने दोषी माना था. सोमवार को इस मामले में फैसला सुनाते हुए चारों दोषियों के खिलाफ सजा का ऐलान किया है.

अदालत ने गुप्ता और समारिया के अलावा केसी क्रोफा को भी दो साल की सजा सुनाई है जबकि पीके अहलुवालिया को तीन साल की सजा मिली है. हालांकि सजा सुनाए जाने के ठीक बाद इन सभी को जमानत मिल गई.

एच सी गुप्ता

यह 31 दिसंबर 2005 से नवंबर 2008 तक कोयला सचिव थे. इन्होंने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह के समक्ष कमल स्पॉंज स्टील एंड पावर लिमिटेड (केएसएसपीएल) कंपनी को मध्य प्रदेश में कोयला ब्लॉक आवंटित करने की सिफारिश की थी, जो उस समय आवंटन के नियमों को पूरा नहीं करती थी. सीबीआई ने विशेष अदालत से गुप्ता को धोखाधड़ी और आपराधिक षडयंत्र के जुर्म में अधिकतम सात साल जेल की मांग की है. गुप्ता के खिलाफ कोयला घोटाले से जुडे 10 और मामले लंबित हैं, जिन पर अलग से कार्रवाई चल रही है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों पर संयुक्त सुनवाई की गुप्ता की याचिका को पिछले वर्ष खारिज कर दिया था.

के एस क्रोफा

यह कोयला मंत्रालय के तत्कालीन संयुक्त सचिव थे. इन्हें भी विशेष कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितता का दोषी माना है. क्रोफा असम मेघालय कैडर के 1982 बैच के आईएएस अ​धिकारी हैं. फिलहाल यह मेघालय के मुख्य सचिव हैं. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मेघालय सरकार क्रोफा पर कोई कार्रवाई करने से पहले विशेष कोर्ट के फैसले की कॉपी का इंतजार कर रही है. वहीं, क्रोफा ने कहा है कि उनको जब फैसले की कॉपी मिल जाएगी तो वे उच्च अदालत में फैसले के खिलाफ अपील करेंगे. मेघालय सरकार ने उनको 29 फरवरी 2016 में उनको मुख्य सचिव बताया था. इन पर कोयला घोटाले से जुड़े 8 मामलों में शामिल होने का आरोप है.

के सी समारिया

यह कोयला मंत्रालय के तत्कालीन निदेशक थे. कोयला ब्लॉक आवंटन में य​ह भी अनियमितता के दोषी माने गए हैं. इन पर कोयला घोटाले से जुड़े 6 मामलों में संलिप्त होने का आरोप है.

पवन कुमार आहलूवालिया

यह कोयला घोटाले में शामिल कंपनी केएसएसपीएल के प्रबंध निदेशक हैं. इनकी कंपनी के सतना और जयपुर में कार्यालय हैं.

गंगा को पवित्र नदी माना जाता है। हरिद्वार जाकर लोग इसमें डुबकी लगाकर अपने सारे पाप धोते हैं। केंद्र सरकार ने गंगा को साफ करने के लिए नमामि गंगे योजना भी चलाई है। लेकिन इन योजनाओं का कोई खासा लाभ नहीं मिला पा रहा है। गंगा में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि इसका पानी पीने तो क्या नहाने लायक भी नहीं बचा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने एक आरटीआई के जवाब में बताया कि उत्तराखंड में गंगोत्री से लेकर हरिद्वार तक की गंगा नहाने लायक नहीं है। हर पैमाने पर इस पवित्र नदी का पानी अपवित्र और असुरक्षित है। रिपोर्ट के अनुसार, हरिद्वार में गंगा के 20 घाटों पर हर रोज करीब 50 हजार श्रद्धालु स्नान करते हैं।

11 जगहों से एकत्रित किए नमूने

सीपीसीबी ने उत्तराखंड में गंगोत्री से हरिद्वार के बीच 11 जगहों से गंगाजल के नमूने जांच के लिए एकत्रित किए थे। यहां गंगा 294 किलोमीटर लंबी है। आरटीआई में इन नमूनों के परीक्षण की रिपोर्ट मांगी गई थी। सीपीसीबी के वरिष्ठ वैज्ञानिक आरएम भारद्वाज ने बताया कि गंगाजल की गुणवत्ता चार मानकों पर मापी गई। इनमें डिजाल्वड ऑक्सीजन (डीओ), बॉयोलॉजिक ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी), कोलिफॉर्म (बैक्टीरिया) और तापमान शामिल है। जांच में पता चला कि हरिद्वार के आसपास गंगाजन में बीओडी, कोलिफॉर्म और दूसरे जहरीले पदार्थों की मात्रा बहुत ज्यादा है।

मिले जहरीले तत्व

सीपीसीबी के मानकों के अनुसार, नहाने के एक लीटर पानी में बीओडी का स्तर 3 मिलीग्राम से कम होना चाहिा, जबकि गंगा के पानी के नमूनों में यह 6.4 मिलीग्राम से ज्यादा पाया गया। वहीं हर की पौड़ी के प्रमुख घाटों सहित गंगा के पानी में कोलीफॉर्म भी काफी ज्यादा मात्रा में पाया गया। हर 100 मिलीलीटर पानी में कोलिफॉर्म 90 एमपीएन (मोस्ट प्रोबेबल नंबर) होना चाहिए, यह 1600 एमपीएन पाया गया। वहीं ओडी भी प्रति लीटर 4 से 10.6 मिलीग्राम पाया गया, जबकि यह 5 मिलीग्राम होना चाहिए।

नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे का आज निधन हो गया. उनका निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ. अनिल माधव 60 साल के थे.

अनिल माधव दवे पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ थे. आज सुबह उन्होंने घर पर अनइज़ी होने की शिकायत की. उन्हें एम्स ले जाया गया. जहां उन्होंने आखिरी सांस ली .राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और पीएम मोदी ने उनके निधन पर शोक जताया है.

दवे की कल रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पॉलिसी के मसले पर बैठक हुई थी. मोदी ने उनके निधन पर दुख जताया है. उन्होंने ट्वीट करके इसे अपनी निजी क्षति बताया है. उन्होंने लिखा कि कल रात ही उनसे मुलाकात हुई थी. उनके निधन से जनता की सेवा के प्रति प्रतिबद्ध सेवक खो दिया है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी दवे के निधन पर शोक जताया है. उन्होंने लिखा है कि दवे ने बिना थके नर्मदा को अक्षुण बनाए रखने के लिए काम किया. उन्होंने दवे के परिवार वालों के प्रति संवेदना प्रकट की.

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बीएल टंडन, मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह, बीजेपी के संगठन महामंत्री सौदान सिंह, राष्ट्रीय महासचिव सरोज पांडेय, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया, बीजेपी के छग अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने भी उनके निधन पर शोक जताया है.

दवे 2009 से राज्यसभा के सदस्य हैं. 2016 में कैबिनेट विस्तार में उन्हें पर्यावरण मंत्रालय दिया गया. वे आजीवन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे. वे संसद की कई समितियों के सदस्य रहे. ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के संसदीय फोरम का भी वे हिस्सा रहे

रेवाड़ी। अाखिरकार स्‍कूली छात्राओं के अागे हरियाणा सरकार काे झुकना ही पड़ा। भीषण गर्मी में एक सप्‍ताह से अधिक समय से अनशन कर रहीं रेवाड़ी जिले के गोठड़ा स्कूल की 80 छात्राओं की जीत हुई है। 
अब हरियाणा सरकार ने उनकी मांग काे मान लिया है और स्‍कूल को अपग्रेड करने की घोषणा की है। हरियाणा सरकार ने इसके बारे में नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। इस हाई स्‍कूल को शैक्षणिक सत्र 2017-18  से ही सीनियर सेकेंडरी तक क्रमोन्नत कर दिया गया है।

इसक बाद छात्राओं ने अपना अनशन तोड़ दिया। अभिभावकों ने उनको जूस पिलाकर उनका अनशन खत्‍म कराया। स्‍कूल को अपग्रेड कर सीनियर सेकेंडरी तक करने जानकारी मिलने के बाद छात्राओं और अभिभावकों में खुशी की लहर दौड़ गई। क्षेत्र के लाेगों ने कहा कि बेटियों का संघर्ष रंग लाया। हमें उन पर गर्व है।

जानकारी के मुताबिक ये छात्राएं स्कूल छात्राओं की भूख हड़ताल को एक हफ्ते से ज्यादा हो गया लेकिन उनकी मांग सरकार मानने को तैयार नहीं थी। भीषण गर्मी के बीच अनशन कर रहीं छात्राओं की तबीयत बिगड़ने लगी। बुधवार को तीन छात्राओं को अस्पताल ले जाना पड़ा। अब तक 10 छात्राओं की तबीयत बिगड़ चुकी है।

दूसरी तरफ, हरियाणा के शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने छात्राओं के इस आंदोलन को राजनीति से प्रेरित करार देते रहे। मंत्री का कहना था कि स्कूल अपग्रेडेशन एक प्रक्रिया के तहत होगा। लेकिन जब छात्राओं की आलत बिगड़ने लगी ताे मनोहर सरकार के होश उड़ गए अौर सरकार ने अानन-फानन में स्‍कूल का दर्जा बढ़ाने का एलान कर दिया। इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया। हरियाणा के शिक्षामंत्री रमाबिलास शर्मा ने भी इसकी पुष्टि की है। उन्‍होंने कहा, हमने स्‍कूल का दर्जा बढ़ा दिया है।

रेवाड़ी के खोल ब्लॉक के गांव गोठड़ा टप्पा डहीना की 80 से अधिक लड़कियां बीते एक हफ्ते से अनशन पर थीं। उनकी मांग है कि गांव के 10वीं तक के स्कूल का दर्जा बढ़ा कर सीनियर सेकेंडरी किया जाए जिससे कि वहां 12वीं तक पढ़ाई हो सके।
उनका कहना था कि लड़कियों को 10वीं से आगे की पढ़ाई के लिए कनवली स्थित स्कूल जाना पड़ता है। यह स्कूल उनके गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर है। छात्राओं के मुताबिक उन्हें रोज स्कूल आने-जाने में छेड़खानी का शिकार होना पड़ता है। गांव के सरपंच सुरेश चौहान का कहना है कि छेड़छाड़ करने वाले शोहदे किस्म के लड़के इतने शातिर हैं कि हेलमेट पहने रखते हैं, जिससे कि उनकी पहचान ना हो सके।
लड़कियों ने अपनी परेशानी घरवालों के साथ ही सरपंच को भी बताई। घरवालों ने तो लड़कियों को यहां तक कह दिया कि स्कूल छोड़ दो। वहीं सरपंच ने मामले को स्थानीय अधिकारियों के सामने उठाया लेकिन बात नहीं बनी। आखिरकार इन लड़कियों ने खुद ही मोर्चा संभालते हुए भूख हड़ताल शुरू कर दी थी।

नई दिल्ली. नेशनल हेरल्ड केस में राहुल गांधी और सोनिया गांधी को झटका लगा है। इन दोनों ही लोगों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। हाई कोर्ट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ आयकर विभाग जांच को अनुमति दी।कोर्ट ने जांच के लिए इंकल टैक्स को हरी झंडी दे दी है। अब मामूल किया जाएगा कि हेराफेरा की गई है कि नहीं। अब आयकल विभाग यंग इंडिया की जांच करेंगा।
दरअसल सुब्रमण्यम स्वामी ने मांग की थी कि उन्हे इंडियन नेशनल कांग्रेस और एसोसिएट जनरल प्राइवेट लिमिटेड की वित्तीय जानकारी चाहिए, जिस पर कोर्ट ने संबंधित विभागों को आदेश दिए थे कि स्वामी को दस्तावेज उपलब्ध कराएं जाएं।बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने इस मामले में कोर्ट का रुख किया था. उन्होंने अपनी अर्जी में आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी व अन्य ने मिलकर षड्यंत्र रचा. जिसके बाद असोसिएटिड जरनल लिमिटेड को 50 लाख रुपये देकर यंग इंडियन लिमटेड ने 90.25 करोड़ रुपये वसूलने का अधिकार ले लिया. स्वामी ने कहा था कि सोनिया और राहुल गांधी ने नेशनल हेरल्ड की पांच हजार करोड़ की संपत्ति पर कब्जा कर लिया है.
आपकी जानकारी के लिए बतां दें कि नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अलावा मोतीलाल वोरा, आस्कर फर्नाडिज, सैम पित्रेदा और सुमन दुबे आरोपी हैं।

नई दिल्ली: पाकिस्तान में फांसी की सजा पाए भारतीय नौ सेना के पूर्व अधिकारी कूलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर इंटरनेशनल कोर्ट ने रोक लगा दी है. कुलभूषण जाधव मामले में भारत को बड़ी कूटनीतिक जीत मिली है. पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने कथित जासूसी के आरोप में भारतीय नागरिक और नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा सुनाई थी. भारत ने पाकिस्तानी की सैन्य अदालत के इस फैसले के खिलाफ इस अदालत में 8 मई को अपील की थी. अब तक पाकिस्तान की ओर से इस बारे में कोई बयान नहीं आया है.

अंतर्राष्ट्रीय अदालत की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत ने इस मामले में पाकिस्तान पर विएना संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया था. भारत की ओर से दायर अपील में ये भी बताया गया था कि कुलभूषण जाधव को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया और ना ही उन्हें भारत के उच्चायोग अधिकारियों से मिलने की इजाजत दी गई.

पाकिस्तान ने भारतीय नौसेना के पूर्व कमांडर जाधव की गिरफ्तारी 29 मार्च 2016 को दिखाई थी. पाकिस्तान का दावा था कि जाधव बलूचिस्तान और कराची में आतंकवाद फैलाने का काम कर रहे थे. वहीं, भारत का दावा था कि जाधव को अगवा किया गया है. गिरफ्तारी के बाद भारतीय उच्चायोग ने दर्जनों बार उनसे मिलने की इजाजत मांगी थी, लेकिन पाकिस्तान ने सभी अंतर्राष्ट्रीय कानूनों को दरकिनार करते हुए इसकी इजाजत नहीं दी. 11 अप्रैल 2017 को अचानक खबर आई कि पाकिस्तान के मिलिट्री कोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा दे दी है.

भारतीय विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर बताया कि अंतर्राष्ट्रीय अदालत ने ये फैसला रूल ऑफ कोर्ट के पैरा-4 के अनुच्छेद 74 के तहत सुनाया है. उन्होंने बताया कि उन्होंने जाधव की मां को इस फैसले की जानकारी दी है. सुषमा के मुताबिक सीनियर वकील हरीश साल्वे इस मामले में भारत की पैरवी कर रहे हैं.

भारत ने इस मसले में कडा रुख अख्तियार किया था. विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में कहा था कि जाधव को छुड़वाने के लिए भारत किसी भी हद तक जाएगा. मसला दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव का बड़ा सबब था. भारत ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त को कई बार तलब कर जाधव से मिलने की इजाजत मांगी थी. भारत की सरकार जाधव को बचाने के लिए पाकिस्तानी कानूनी व्यवस्था में मौजूद विकल्पों पर भी गौर कर रही थी.

नई दिल्ली। भाजपा ने 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में एक करोड़ लोगों को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद करीब तीन साल बाद भी सरकार अपने इस वादे को पूरा नहीं कर पाई है। लेकिन अब अपने इस वादे को पूरा करने के लिए अब मोदी सरकार ने एक नया कदम उठाया है, जिससे वादा तो पूरा होगा ही और लोगों की नौकरियां भी मिलेंगी।

नौकरियां पैदा करने के लिए मोदी सरकार ने एक अहम कदम उठाते हुए कहा है कि जो भी प्रस्ताव कैबिनेट के पास भेजे जाएंगे, उन्हें यह भी बताना होगा कि वह इससे आखिर कितनी नौकरियां पैदा करेंगे। मोदी सरकार ने यह कदम रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया है। इस तरह से मोदी सरकार अपना वादा तो पूरा करेगी ही, आने वाले चुनावों में भी उन्हें इसका खूब फायदा मिलेगा।
वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि जब भी कैबिनेट में कोई प्रस्ताव आता है तो पीएम रोजगार के बारे में जरूर पूछते हैं। वह बोले कि जब भी कोई प्रस्ताव चर्चा के लिए आता है तो प्रधानमंत्री कैबिनेट मीटिंग में पूछते हैं कि रोजगार के कितने मौके बनेंगे?

हर महीने 15 लाख लोगों को चाहिए नौकरी? क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार हर महीने करीब 15 लाख लोगों को नौकरी की जरूरत होती है यानी हर महीने करीब 15 लाख लोग रोजगार के बाजार में आते हैं। वहीं दूसरी ओर कंपनियों में तेजी से बढ़ रहे ऑटोमेशन की वजह से नौकरियां मिलने में दिक्कत आती है।

बेरोजगारी दूर करने का ये है ऐक्शन प्लान

आर्थिक वृद्धि के साथ रोजगार के मौके बनने की रफ्तार बढ़ाने के लिए नीति आयोग ने तीन साल का एक ऐक्शन प्लान पेश किया है, जिसमें विभिन्न सेक्टरों में रोजगार सृजित करने की बात की गई है. सीआईआई के अनुसार, वित्त वर्ष 2012 से 2016 के बीच भारत में रोजगार के 1.46 करोड़ मौके बने थे. यानी हर साल 36.5 लाख अवसर. कामकाजी उम्र वाले लोगों की संख्या में 8.41 करोड़ का इजाफा हुआ, लेकिन वास्तिक श्रम बल में बढ़ोतरी केवल 2.01 करोड़ रही। कामकाजी उम्र वाली आबादी का 24 प्रतिशत हिस्सा श्रम बल में जुड़ा, जबकि 76 प्रतिशत हिस्सा इससे बाहर रहा.

इकनॉमिक सर्वे 2017 में कहा गया है कि आबादी में युवाओं की अधिक संख्या से ग्रोथ में होने वाली बढ़ोतरी अगले पांच वर्षों में उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएगी क्योंकि तब तक कामकाजी उम्र वाले लोगों की संख्या में ठहराव आ चुका होगा. ऐसे में कौशल और उद्यमिता को बढ़ावा देना जरूरी हो गया है.

पीएम मोदी ने इससे पहले कहा था- हमारे देश में करीब 65 फीसदी लोग 35 साल से कम की उम्र के हैं। हम देश का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं और हमारे पास एक बहुत ही बड़ा घरेलू बाजार है, जहां पर हम अपने उत्पाद को बेच सकते हैं। किसी भी देश के पास इतने मौके नहीं हैं, जितने हमारे देश के पास हैं।

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