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राजनीति (110)

केंद्र में सत्ताधारी एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने राष्ट्रपति पद के अपने प्रत्याशी के नाम पर बना सस्पेंस अाख़िर ख़त्म कर दिया है. एनडीए ने बिहार के मौज़ूदा राज्यपाल 71 वर्षीय रामनाथ काेविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है. सोमवार को भाजपा संसदीय दल की बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उनके नाम की घाेषणा की.

बाद में मीडिया से बातचीत में शाह ने बताया कि काेविंद 23 जून काे पर्चा दाखिल करेंगे. शाह के मुताबिक, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविंद के नाम पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य पार्टियों के नेताओं से बात की है. हमें उम्मीद है कि उनके नाम पर सर्वसम्मति बन जाएगी.’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि उपराष्ट्रपति पद के लिए एनडीए प्रत्याशी के नाम पर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है.

उत्तर प्रदेश में कानपुर जिले की डेरापुर तहसील के छोटे से गांव परौंख में एक अक्टूबर 1945 को रामनाथ कोविंद का जन्म हुआ. वे अनुसूचित जाति वर्ग के तहत आने वाले कोली समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. उन्होंने 1977 से 1979 तक दिल्ली उच्च न्यायालय में वकालत की. इस बीच 1978 में सुप्रीम कोर्ट के वकील बन गए और 1980 से 1993 तक सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के स्थायी वकील रहे. कोविंद 1991 में भाजपा में शामिल हुए. इसके बाद 1994 और फिर 2000 में लगातार दो बार उत्तर प्रदेश से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए. वे भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे हैं. साथ ही पार्टी के दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय कोली समाज अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

नयी दिल्ली. अगले महीने होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर देश की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गयी है. इसके मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी की ओर से बनायी गयी कमेटी के सदस्य वेंकैया नायडू और राजनाथ सिंह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से आज मुलाकात करेंगे. केंद्र की मोदी सरकार चाहती है कि नये राष्ट्रपति  का चुनाव आम सहमति से हो. इससे पहले कांग्रेस ने गुरुवार को कहा कि वह आम सहमतिवाले राष्ट्रपति उम्मीदवार को प्राथमिकता देगी और बेहतर होगा कि सरकार भी इसे समझ ले.

कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता आनंद शर्मा ने यहां संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस पार्टी ने प्रत्येक महत्वपूर्ण निर्णय पर आम सहमति कायम करने का प्रयास किया है. किंतु राष्ट्रपति चुनाव को लेकर तसवीर अभी तक स्पष्ट नहीं हो पायी है. उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि सरकार इस मुद्दे पर सर्वसम्मति की आवश्यकता को समझे. बेहतर हो कि आम सहमति बने. यह पूछे जाने पर कि क्या प्रणब मुखर्जी के उत्तराधिकारी को लेकर कोई सहमति बनने के आसार हैं, शर्मा ने कहा कि मैं नहीं कह सकता कि सरकार क्या सोच रही है.

इधर, केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने राकांपा प्रमुख शरद पवार तथा राजग गठबंधन के घटक तेदेपा प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू से इस मुद्दे पर बातचीत की. चंद्रबाबू ने कहा कि वह राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए प्रधानमंत्री के निर्णय का समर्थन करेंगे. वहीं, पवार ने कोई आश्वासन नहीं दिया. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह शुक्रवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से उनके आवास पर मुलाकात करेंगे.

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने किसानों द्वारा कर्जमाफी की बढ़ रही मांगों पर सोमवार को कहा कि इसके लिए राज्यों को अपने संसाधनों से कोष का इंतजाम करना होगा। वित्त मंत्री ने ऐसा कहकर एक तरह से इस संदर्भ में केंद्र द्वारा किसी भी तरह की मदद को खारिज कर दिया है।

यह पूछे जाने पर कि किसानों की कर्जमाफी के लिए क्या केंद्र सरकार राज्यों की मदद करेगी, जेटली ने कहा, "मैं इस मुद्दे पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुका हूं। जो राज्य इस तरह की योजनाओं को आगे बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें अपने संसाधनों से इसके लिए धन की व्यवस्था करनी होगी। इसके अलावा, केंद्र सरकार की तरफ से मुझे कुछ नहीं कहना है।"

वित्त मंत्री ने फंसे हुए कर्ज (बैड लोन) की बड़ी समस्या पर सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों के प्रमुखों के साथ सुबह चर्चा करने के बाद यह बात कही।

किसानों की कर्जमाफी तथा अन्य मांगों को लेकर 10 दिवसीय हड़ताल के मद्देनजर महाराष्ट्र ने रविवार को लघु एवं सीमांत किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की। इसी तरह, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि ऋणों की माफी की मांग पर गौर करने का वादा किया है।

इस साल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा उत्तर प्रदेश में भारी जीत दर्ज करने के फौरन बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने किसानों के 30,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज को माफ कर दिया।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने किसानों के मुद्दों पर केंद्र की मोदी सरकार और मध्य प्रदेश के शिवराज सरकार को जमकर घेरा है. राहुल गांधी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के नीमच में कहा कि केंद्र की मोदी सरकार किसानों को कर्म माफी नहीं सिर्फ गोली दे सकती है. राहुल गांधी मंदसौर जाना चाह रहे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें नीमच में ही गिरफ्तार कर लिया था. जिसके बाद राहुल गांधी ने पहले जमानत लेने से इनकार कर दिया था.

दरअसल प्रशासन की ओर से सुझाए गए फॉर्मूले के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आखिरकार जमानत लेने को राजी हो गए. प्रशासन ने राहुल को एमपी-राजस्थान बॉर्डर पर किसानों से मिलने की मंजूरी दे दी. इस वक्त राहुल गांधी नीमच बॉर्डर पर किसानों के परिवारों से मिलने के लिए पहुंच गए हैं.

पूर्व कांग्रेस सांसद मीनाक्षी नटराजन ने नीमच गेस्ट हाउस जहां राहुल और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को रखा गया था, के बाहर पत्रकारों को बताया कि लंबी बहस के बाद प्रशासन राहुल को उन किसानों के परिवार से मिलने देने को राजी हो गया है जो पुलिस फायरिंग में मारे गए. हम उनसे राजस्थान-मध्यप्रदेश के बॉर्डर पर मिलने की कोशिश करेंगे.

मंदसौर में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में 5 लोगों की मौत हो गई थी. कांग्रेस ने इस मामले के लिए शिवराज सरकार का इस्तीफा मांगा था.

इससे पहले राहुल गांधी ने ऐलान किया था कि वे मंदसौर जाकर पीड़ित किसान परिवारों से मिलेंगे. प्रशासन ने राहुल गांधी को मंदसौर जाने की इजाजत नहीं दी तो वे दिल्ली से राजस्थान के उदयपुर पहुंचे और वहां से सड़क के रास्ते बाइक से मंदसौर जा रहे थे, लेकिन मध्य प्रदेश की सीमा पर पहुंचते ही नीमच में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. जिसके बाद राहुल ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के 3 साल में किसानों की स्थिति बदहाल हो गई है.

मंदसौर। मध्य प्रदेश में किसानों के आंदोलन के बाद हिंसाग्रस्त मंदसौर, नीमच, उज्जैन,रतलाम और देवास समेत कई इलाकों में हालात फिलहाल सामान्य नहीं हुए हैं। हालांकि हालात ज्यादा खराब मंदसौर में हैं जहां मंगलवार (6 जून) को केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) ने किसानों पर गोली चलाई थी, जिसमें 6 किसान मारे गए थे।


इसी कड़ी में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुरूवार को मंदसौर पहुंचे। राजस्थान स्थित उदयपुर के रास्ते राहुल मंदसौर मोटरसाइकिल से पहुंचे। हालांकि जिले की सीमा पर राहुल को पुलिस ने रोक लिया। उन्हें नीमच में ही हिरासत में लिया गया। इसके बाद राहुल ने अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखा कि राजस्थान और मध्य प्रदेश की सरकार ने मुझे मंदसौर में मारे गए किसानों से मिलने और राज्य में घुसने से रोकने के लिए अपना सर्वेश्रेष्ठ काम किया। ऑफिस ऑफ आरजी पर लिखा गया है कि कौन सा कानून कहता है कि किसानों के साथ एकजुटता में खड़ा होना अवैध है, जो अपने अधिकार की मांग करने के लिए मारे गए थे। इससे पहले बुधवार को राहुल ने इस बात की जानकारी दी थी कि वो मंदसौर में मारे गए किसानों के परिजनों से मिलने के लिए वहां जाएंगे।

नयी दिल्लीः देश की सीमाआें पर आैर आंतरिक भू-भाग में शांति व्यवस्था स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी हाल ही में विदेशी सरजमीं से चीन की सीमा पर बीते 40 साल में एक भी गोली नहीं चलने की बात कही थी, लेकिन मंगलवार को पंजाब के अमृतसर में आॅपरेशन ब्लू स्टार की 33वीं बरसी पर आंतरिक अशांति को फैलाने में अहम भूमिका निभाने वाले खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाये गये.

गौरतलब है कि आज ही के दिन वर्ष 1984 को पंजाब में आतंरिक आतंकवाद को बढ़ावा देने आैर खालिस्तान की मांग करने वाले हथियारबंद आतंकियों को अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से खदेड़ने के लिए आॅपरेशन ब्लू स्टार चलाया गया था. मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार, अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में मंगलवार को खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाये गये हैं.

मीडिया में आ रही खबरों में यह भी बताया जा रहा है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के 33 साल पूरे होने से पहले अमृतसर समेत पंजाब के कई भागों में सुरक्षा की सख्त व्यवस्था की गयी है. सीआरपीएफ, आईटीबीपी और आरएएफ सहित अर्धसैनिक बलों की करीब 15 कंपनियां राज्य के विभिन्न हिस्सों में तैनात की गयी हैं. दअरसल, कई कट्टरपंथी संगठनों ने स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए की गयी सैन्य कार्रवाई की बरसी मनाने की घोषणा की थी.

मीडिया की खबरों के अनुसार, अमृतसर में अर्धसैनिक बलों की 7 कंपनियां तैनात की गयी हैं, जबकि शेष कंपनियां लुधियाना, जालंधर, फगवाड़ा, मोहाली, बटाला और पठानकोट तथा गुरदासपुर जिलों में चौकसी कर रही हैं. केवल अमृतसर में ही करीब 5,000 सुरक्षाकर्मियों को कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए तैनात किया गया है. सीआरपीएफ और आईटीबीपी की पांच कंपनियां और आरएएफ की दो कंपनियां यहां तैनात की गई है. कई स्थानों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी की जा रही है. स्वर्ण मंदिर के आसपास भी सुरक्षा बढ़ाई गई है जबकि परिसर के अंदर एसजीपीसी का कार्यबल निगरानी कर रहा है.

मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार, वर्ष 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी बलवंत सिंह राजोआना ने सभी राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों से मंगलवार को ऑपरेशन ब्लूस्टार के 33 साल होने पर शांति और सौहार्द बनाए रखने का अनुरोध किया है. यहां केंद्रीय कारागार से एक पत्र में राजोआना ने सभी सिख धार्मिक और राजनीतिक संगठनों से अपने मतभेद भुलाने और ऑपरेशन ब्लूस्टार के शहीदों को श्रद्धांजलि देने की अपील की.

राजोआना के हाथ से लिखे गये दो पन्ने का पत्र को उसकी बहन कमलदीप कौर ने मीडिया को जारी किया. हत्या अपराधी ने सभी धड़ों से अकाल तख्त की पवित्रता बनाये रखने को कहा. उसने लिखा है कि हमें बस गुरबानी के जरिये सभी शहीदों को श्रद्धांजलि देनी चाहिए. नारेबाजी मत करें. बब्बर खालसा का अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी राजोआना 31 अगस्त 1995 को हुई पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या का मुख्य दोषी है.

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व नेता कपिल मिश्रा के साथ धक्का-मुक्की की गई। मंत्रिमंडल और पार्टी से निकाले जाने के बाद बीते कई सप्ताह से लगातार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य मंत्रियों पर कई प्रकार के आरोप लगा रहे कपिल के साथ विधानसभा में आप नेताओं ने धक्का-मुक्की की।

मिश्रा ने विधानसभा के अंदर एक बैनर लहराया और दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार पर चर्चा के लिए रामलीला मैदान में विधानसभा का मुक्ताकाश सत्र बुलाए जाने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने मिश्रा को चेतावनी दी, लेकिन मिश्रा नहीं रुके। गोयल ने बाद में मार्शलों को मिश्रा को विधानसभा से बाहर ले जाने का आदेश दे दिया।

इससे पहले कि मार्शल मिश्रा तक पहुंच पाते, आप के तीन-चार नेता उनसे उलझ पड़े। मिश्रा ने विधानसभा से बाहर पत्रकारों से कहा, ‘इससे पहले कि मार्शल मुझे बाहर करते, मदनलाल, जरनैल सिंह और कुछ अन्य सदस्यों ने मुझ पर हमला कर दिया।’ बीते कई सप्ताह से मिश्रा ने दिल्ली सरकार, केजरीवाल और दिल्ली सरकार में कई अन्य मंत्रियों के खिलाफ मोर्चा खोला रखा है। 

नई दिल्ली. मोदी सरकार के 3 साल पूरे होने से ठीक एक दिन पहले एक बड़ी उपलब्धि के बारे में बताया गया है. नोटबंदी से देश को काफी फायदा हुआ है. नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था को करीब 5 लाख करोड़ रुपए का फायदा हुआ है. यह रिपोर्ट एक हाई लेवल इंटरनल कमेटी की स्टडी के बेसिस पर जारी की गई है. 2016-17 में कुल 300 करोड़ की ऑनलाइन ट्रांजेक्शन किया गया था, जबकि 2017-18 में ये आकंड़ा 2500 करोड़ तक पहुंच सकता है. यानी की करीब 8 गुना की बढ़ोतरी हो सकती है. नोटबंदी के जरिए 500 और 1000 के पुराने नोटों का चलन बंद कर दिया गया था.

सरकार की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था में इस वक्त 14.2 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में हैं, जो कि सारी ट्रांजैक्शन जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हैं. इसमें यह भी अनुमान लगाया गया है कि नोटबंदी की वजह से भारत का कुल निजी आयकर राजस्व भी अगले दो वर्षों में बढ़कर दोगुना हो जाएगा और इसके कुछ लाभ अभी से दिखने भी लगे हैं.

वित्त वर्ष 2016-17 के लिए सेल्फ टैक्स असेसमेंट फॉर्म भरने वाले लोगों की संख्या में 23.8 फीसदी का उछाल देखा गया है. सरकार का मानना है कि इस 23.8 फीसदी में से कम से कम 10 फीसदी का बढ़ोतरी को नोटबंदी की वजह से ही देखने को मिली है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, नोटबंदी का एक सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि लोग डिजिटल लेनदेन की तरफ आकर्षित हुए हैं. वित्त वर्ष 2016-17 में कुल 300 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन दर्ज की गई. वहीं सरकार का अनुमान है कि वित्तवर्ष 2017-18 के शुरुआती हफ्तों का चलन आगे भी जारी रहा तो इस साल डिजिटल ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़कर 2,500 करोड़ तक जा सकती है.

पेटीएम, एसबीआई बडी और फ्रीचार्ज आदि मोबाइल वॉलेट के जरिये अभी ही रोजाना करीब 200 करोड़ रुपये का लेनदेन हो रहा है. वहीं BHIM ऐप के लॉन्च होने के पांच महीनों के अंदर करीब दो करोड़ लोगों ने इसे डाउनलोड किया है. इस अध्ययन के मुताबिक, BHIM और UPI पेमेंट गेटवे के जरिये अभी ही करीब रोजाना 140 करोड़ रुपये का लेनदेन हो रहा है. वहीं डेबिट कार्ड का भी इस्तेमाल नोटबंदी के बाद से काफी बढ़ा है. वर्ष 2015-16 में जहां डेबिट कार्ड से करीब 117 करोड़ ट्रांजैक्शन हुआ, जो कि 1.58 लाख करोड़ मूल्य का था. वहीं 2016-17 में यह बढ़कर 240 करोड़ ट्रांजैक्शन हो गया, जिसका कुल मूल्य 3.3 लाख करोड़ रुपये था.

नई दिल्ली: केंद्रीय कर्मचारियों को सरकार एक जल्द ही एक अच्छी खबर सुना सकती है। सरकारी विभाग के सचिवों की एक उच्च स्तरीय समिति आज कर्मचारियों के भत्ते को लेकर बैठक कर सकती है।
बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों के भत्ते को लेकर अशोक लवासा की अध्यक्षता में बनी समिति सातवें वेतन आयोग पर अपनी समीक्षा रिपोर्ट वित्त मंत्री अरुण जेटली को पहले ही दे चुकी है।
हालांकि सचिवों की इस बैठक की कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं दी गई है लेकिन, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यह बैठक बुधवार को हो सकती है।
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कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा के साथ गृह मंत्रालय, कार्मिक और प्रशिक्षण, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और रेलवे के अधिकारी इस बैठक में हिस्सा ले सकते हैं।
यहां पढ़िए मुख्य बातें -
1. बैठक में संशोधित भत्ते पर एरियर और बेसिक वेतन में बढ़ोत्तरी जैसे मुख्य मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
2. सातवें वेतन की सिफारिशों की समीक्षा का काम केंद्र सरकार ने वित्त सचिव असोक लवासा को दिया है।
3. अगर इस बैठक में सचिवों की समिति की सहमति बनती है तो रिपोर्ट अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय कैबिनेट को भेजी जाएगी।
4. सातवें वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों के कुल 196 भत्तों में से 52 भत्ते खत्म करने की सलाह के साथ ही 36 छोटे भत्तों को बढ़ाने की बात कही थी।
5. अगर ये सिफारिशें लागू हुईं तो इससे 50 लाख केंद्रीय कर्मियों को लाभ मिलेगा।

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